Tuesday, September 12, 2017

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ

अमित शर्मा- 11-09-201


फूलों सी नाज़ुक होती हैं
बेटियां
मखमल सी मुलायम होती हैं
बेटियां
आंगन की पवित्र तुलसी होती हैं
बेटियां
सुबह की पहली भोर होती हैं
बेटियां
सुख का अहसास होती हैं
बेटियां
दुख का हर लम्हा मुस्कुराकर भगा दें
बेटियां
परिवार का अभिमान होती हैं
बेटियां
देश की शान हैं हमारी प्यारी
बेटियां

फिर क्यों इन बेटियों पर ज़ुल्म होते हैं ?
फिर क्यों इन मासूमों के कोख़ में कत्ल होते हैं ?
क्यों हमें दहेज के लिए जलाते हो ?
क्यों हमारे चेहरे पर तेज़ाब फिंकवाते हो ?

ये सवाल मेरा  आपसे है,
आप से, आप से और आप से

ज़रा देखो चारों ओर,
क्या हम आज़ाद हैं ?
क्या हम समान हैं ?
रखो अपने दिल पर हाथ,
कसम खाओ सब मिलकर आज

अब बेटियों को भी मिलेगा मान
बेटा-बेटी को मानो एक समान
आओ सब मिलकर गाओ
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ

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